सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को केंद्र से कहा कि महामारी के दौरान लोगों का इलाज कर रहे डॉक्टरों को भी ब्रेक देने पर विचार करें। सुप्रीम कोर्ट ने कहा, "वे डॉक्टर्स हैं, कोई खैराती नहीं। वे पिछले कई महीनों से लगातार बिना ब्रेक के काम कर रहे हैं। लगातार काम उनकी दिमागी सेहत पर असर डाल रहा है।' अदालत ने कहा कि इस मामले में हम जवाबों और सुझावों को देखेंगे और शुक्रवार को इस पर एक आदेश जारी करेंगे।
हेल्थ वर्कर्स को अवकाश दिया जाएगा
सुप्रीम कोर्ट हॉस्पिटल्स में इलाज और डेड बॉडीज के साथ सही व्यवहार के एक मामले पर सुनवाई कर रहा था। इस दौरान सरकार ने अदालत को भरोसा दिलाया कि वह बेंच के सुझाव पर विचार करेगी और लगातार काम कर रहे हेल्थ वर्कर्स को अवकाश दिया जाएगा।
केंद्र ने कोविड अस्पतालों की सुरक्षा पर भी जानकारी दी
केंद्र की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि केंद्र के पास कई राज्यों की ऑडिट रिपोर्ट भी आई है। इसमें कोविड सेंटर्स में फायर सेफ्टी नॉर्म्स की जानकारी मांगी गई थी। अदालत ने अहमदाबाद और राजकोट के कोविड सेंटर्स में आग लगने के बाद इस मामले में खुद ही संज्ञान लिया था।
सुनवाई के दौरान मेहता ने कहा कि राज्यों से जो जानकारी आई है, वो कोई बहुत अच्छी तस्वीर नहीं पेश कर रही। किसी भी राज्य ने कोविड हॉस्पिटल्स की संख्या का जिक्र नहीं किया है। कुछ तो 2016 की बात कर रहे हैं। इस पर कोर्ट ने कहा, 'गुजरात में 214 अस्पतालों में से 61 के पास NOC नहीं है।' इस पर जवाब देते हुए मेहता ने कहा, 'हम इसीलिए हर चीज रिकॉर्ड में ले रहे हैं। हम ऐसा नहीं दिखाना चाहते हैं कि सब कुछ ठीक-ठाक है।'